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Tuesday, 19 March 2019

सरसों के भावों में 2019 में तेज़ी रहेगी या मंदी ?

सरसों की फसल पककर तैयार हो रही है l कुछ जगह अगेती सरसों की फसल की कटाई और गहाई का काम शुरू हो गया। स्थानीय कृषि मंडियों में सरसों की आवक शुरू हो गई है। सरसों की खेती के अनुकूल मौसम और खाद्यान्न तेल की बढ़ती स्थानीय मांग के कारण सरसों के उत्पादन क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी होती रही है। इस बार देश में रिकॉर्ड 87 लाख मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होने का आंकलन है। बाज़ार के जानकारों के अनुसार देश में अब तक केवल एक बार 72 लाख मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन हुआ है। लेकिन इस बार इससे भी 15 लाख मीट्रिक टन ज्यादा सरसों का उत्पादन होने का अनुमान है । 

श्रीगंगानगर राजस्थान से प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि उपज मंडी में सरसों की आवक शुरु हो गयी है। कृषि उपज मंडी श्रीगंगानगर के बाज़ार के जानकारों के अनुसार सरसों की बोली 3400 रुपए प्रति क्विंटल पर लगी है । जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य या MSP 4200 रुपए प्रति क्विंटल है। सरकार 1 अप्रैल से सरसों की खरीदी शुरू करेगी। तब तक किसानों को भारी घाटे का सामना करना पड़ेगा। किसान संगठनो की मांग है की प्रत्येक किसान से 40 क्विंटल सरसों की सरकारी खरीद होनी चाहिय । एक आंकलन के के अनुसार राजस्थान में 35 लाख मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होने का अनुमान है । मौषम में ठंडक रहने के कारण सरसों का पकाव राजस्थान में अच्छा और उत्पादकता बढ़ने की संभावना है। 


बाजार के जानकारों के अनुसार सरकार को सरसों के बम्पर उत्पादन को हेंडल करने के लिए दोहरी योजना बनाने की जरुरत है । सबसे पहले पाम आयल व अन्य खाद्य तेल के आयत पर ड्यूटी बढानी चाहिए जिससे प्राइवेट कम्पनीज की तरफ से सरसों की स्थानीय मांग बढ़ जाएगी तथा सरसों MSP से नीचे स्थानीय बाज़ार में नहीं बिकेगी। लेकिन चुनाव की आदर्श आचार संहिता लगी होने के कारण केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती । बाज़ार से प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से खाद्य तेल के आयात सस्ते पड रहे है। डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले सात महीने के ऊपरी स्तर को छू चुका है। शुक्रवार को एक डॉलर की कीमत 69.10 रुपये रही। 

किसानों ने तो सरसों का बम्पर उत्पादन करके अपना काम अच्छी तरह कर दिया । अब सरकार व सिस्टम की जिम्मेदारी है की उचित योजना बनाकर इस बम्पर उत्पादन की खपत को बढ़ाये ताकि किसानों व व्यापारियों को नुकसान न उठाना पड़े । सबसे पहले सरकार को योजना बनानी चाहिए की सरसों के बाज़ार भाव MSP से नीचे नहीं जाये । नहीं तो किसानों के लिए बम्पर उत्पादन एक सर दर्द बन कर रह जायेगा । सरकार को सरसों का बल्क निर्यात भी खोलना चाहिए ताकि सरसों का स्टॉक स्थनीय बाज़ारों से जल्दी से जल्दी कम हो । अभी तक सरकार ने सरसों को छोड़ कर सभी खाद्य तेलों के बल्क निर्यात को मंजूर दे दी है । अभी तक सरसों का निर्यात 5 किलो की रिटेल पैकिंग में व कम से कम 900 डॉलर प्रति टन के भाव पर निर्यात करने की अनुमति है ।


 इस सप्ताह NCDEX पर सरसों के भाव 16 अप्रैल के सौदे के लिए 3737 रूपए प्रति क्विंटल, NCDEX पर स्पॉट के भाव 3810 रूपए प्रति क्विटल l इसी तरह NCDEX पर 20 मई के सौदे के लिए 3772 रूपए प्रति क्विंटल, स्थानीय मंडियों में सरसों के भाव 3400-3500 रूपए प्रति क्विटल के आस पास चल रहे है l किसानों को सरसों की सरकारी खरीद के लिए आवश्यक कार्यवाही समय पर ही पूरी कर लेनी चाहिए ताकि उनका उत्पादन समय पर बिना किसी परेशानी के सरकारी खरीद में तुल जाये l

Sunday, 17 March 2019

क्या चना इस बार नयी फसल के आने पर किसानों को कमाई देगा ?

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क्या चना इस बार किसान को कमाई देगा ?

चना भारत में उगाये जाने वाली महत्वपूर्ण दलहनिया फसल है. भारत में ज्यादातर चना रबी के मौषम में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, में लगाया जाता है. रबी के फसल के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष देश में में 10.50 मिलियन मीट्रिक टन चना का उत्पादन होने का अनुमान है जो की घरेलु खपत के लिए प्रयाप्त नहीं है l बाज़ार में तेज़ी मंदी के बारे में अलग अलग धारनाएं है l कुछ फंडामेंटल फैक्टर तेज़ी की और इशारा करते है कुछ फैक्टर चने को मंदी में ही रहने की और इशारा करते है l 

केंद्र सरकार ने घरेलु चना के किसानो को बचाने केलिए चना के आयत पर 60 % आयात शुल्क लग दिया है जो की घरेली बाज़ार के लिए एक अच्छा संकेत है l प्राप्त जानकारी के अनुशार इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया में चने का उत्पादन पिछले सालो से कमजोर है साथ में उच्च आयात शुल्क के कारण चने के आयत में मुनाफा भी नहीं है.


मटर चना की जगह काम आने वाला उत्पाद है त्योंहारो के सीजन में मटर की खपत चने की जगह बढ़ जाती है चना की दाल, चना बेसन की जगह मटर की दाल व मटर का बेसन काम में लिया जाता है सरकार ने मटर के आयत पर भी 50% तक आयत शुल्क लगा रखी है साथ में मटर के आयत पर भी सरकार ने हाल में प्रतिबन्ध लग रखा है l मटर का भाव ऊँचा होने के कारण चना की स्थानीय खपत बढ़ने की आशंका है 

लोकसभा चुनाव के मध्य नजर सरकार किसानो की आय को बढाना चाहती है ऐसे में आयात पर नियंत्रण वाली परिस्थितियों में बदलाव होने की आशंका नहीं है l साथ में सरकार ने राजस्थान व मध्य प्रदेश में लोक सभा चुनाव से पहले 15 लाख टन चना MSP भाव पर खरीदने का निर्णय लिया है l इस समय चने का MSP 4620 रूपए प्रति क्विंटल के आस पास चल रहा है सरकार द्वारा MSP पर खरीदी से स्थानीय बाजरों में चने के भाव को अच्छी मजबूती मिलने की उम्मीद है 

ऊपर वाले कारको के विपरीत दुसरे कारक देखते है तो पता चलता है की नाफेड, जो की चना खरीदी की अग्रणीय सरकारी संस्था है, उसके पास पिछली सालों का बड़ा स्टॉक है l साथ में नाफेड बाज़ार से खुली बोली द्वारा कम दाम पर स्थानीय बाजार में चना की आवक बधा रहा ह l सरकार के पास स्टॉक में रखा चना ख़राब होने लगा है जिससे सरकार इस माल से छूटकारा पाना चाहती है l

अभी चना व बेसन की मांग कम चल रही है जिससे भाव तेज़ी नहीं पकड़ रहे l साथ में अगल 15-20 दिनों में रबी के चना की नयी आवक बज्र में बढ़ जाएगी l नोट बंदी के बाद बाज़ार में नगद पैसे की कमी जिससे नए चने की खरीदी नहीं होगी व आवक का दबाद चने के भावो पर रहेगा l वितवर्ष की सम्पति होने के कारण व्यापारी नए सौदे से बच रहे है l जिससे मार्च अप्रैल में चने की बाज़ार की मांग कम रहेगी l

इन सब से अलग सरकार की चना की आयत निर्यात की पालिसी अनिश्चित है. पीछे कुछ व्यापारियों ने कोर्ट की शरण लेली थी जिससे आयत पर विपरीत असर पड़ा था l आगे लोकसभा के चुनाव भी है मई में बनने वाली नयी सरकार के नीतिया क्या रहेगी किसी को नहीं पता l इससे व्यापारी बड़ी खरीदी से बच कर चल रहे है l

उधर राजस्थान में चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है की चुनाव के बावजूद चना व सरसों की खरीदी जारी रहेगी l चने की खरीदी के लिया आवश्यक टेंडर सरकार जरी कर सकती है l सरकारी एजेंसी राजफैड चना खरीदी के लिए किसानों का राजिस्ट्रेसन ई मित्र के द्वारा कर रही है . सरकारी खरीदी के लिए के लिए किसानो के पंजीयन की प्रक्रिया 13 मार्च से चालू है

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Tuesday, 12 March 2019

चना की चाल , चना की नयी फसल के आने पर क्या रहेगी ?


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चना की नई फसल पर चना की चाल क्या रहेगी ?

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार मुख्य चना उत्पादक क्षेत्रों में चने की फसल अच्छी व पकने को तैयार खड़ी है। चने की फसल की आवक का समय हो गया है । अच्छी आवक की संभावना के कारण चने के भावों में गिरावट हो रही है भावों में आगे भी गिरावट की आशंका है। साथ में सरकारी एजेंसी नाफेड के पास में 20 लाख टन चना है । प्राप्त समाचार के मुताबिक, नाफेड अपने चने को सार्वजनिक वितरण के लिए सप्लाई कर रहा है साथ में खुले बाज़ार में भी बेच रहा है । 

समाचार है की कई जगह नए चने ने मंडियों में दस्तक दे दी है । लुज भाव में नया चना 3700 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बाज़ार में बिक रहा है । राजस्थान, महाराष्ट्र, व मद्य प्रदेश की कई मंडियों में चना 10 -15% नमी के साथ आ रह है आ रहा। मध्यप्रदेश एवं राजस्थान में इस वर्ष अच्छी बारिश व अनुकूल वातावरण की परिस्थितियों के कारण चने की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। लेकिन महाराष्ट्र में फसल कमजोर बताई जा रही है. तीनों प्रदेशों में 6000-7000 बोरी के आस पास चना आ रहा है. ज्यादातर नया चना पंजाब व दिल्ली की चना मीलों में सप्लाई हो रहा है . 


वायदा बाज़ार में मुनाफावसूली से भी चने की कीमतों पर दबाव बन रहा. नेशनल कमोडिटी और डेरिवेटिव्स एक्सचेंज NCDEX में मार्च डिलिवरी वाला चना 24 रुपये या .57 प्रतिशत गिरकर 4,213 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया. इस भाव पर 42270 लॉट का कारोबार हुआ. वन्ही अप्रैल डिलिवरी वाला चना 22 रुपये यानी 0.51 प्रतिशत गिरकर 4,250 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया. इस भाव पर 24,590 लॉट का कारोबार हुआ.

अब मुद्दा यह है इन प्रस्थितियों में किसान क्या करें, अगर किसान को चने भाव ठीक लग रहे है तो किसान अपने माल को बेच सकते है नहीं तो फिर 4-5 महीने रुक सकते है आगे दीवाली के आस पास चने को बेचने का मन बनाएँ क्यों की दीवाली पर चने की माँग रहती है, उस समय भाव ज्यादातर आवक के समय के भाव से बढ़ कर ही मिलते है. लेकिन किसान को जीवन व्यापना के लिए पैसे चाहिए व भावों के और नीचे गिरने की जोखिम भी होती है. अगर किसान के पास कोई दूसरा संसाधन नहीं है तो उसके लिए किसान वैयर हॉउस फंडिंग करवा सकता है साथ में वायदा बाज़ार में 2-3 महिने बाद के भाव में बेचने का सौदे कर के अपनी जोखिम को कम कर सकता है .

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